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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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उत्सव उद्घाटन ~
मध्यान्ह में तीन बजे शताब्दी उत्सव का उद्घाटन काल था । उद्घाटन आचार्य रामलाल जी महाराज नारायणा दादूधाम द्वारा होना था । किन्तु महाराज सामेले से १ बजे स्थान पर आये थे । वे इस समय तक बिलकुल विश्राम नहीं कर सके थे । अत: उनके निर्देशानुसार मंगलाचरण स्तुति व गायन के पश्चात् उनके प्राक्कथन के साथ उत्सव का उद्घाटन समारोह संपन्न हुआ । स्वामी मंगलदासजी ने संक्षेप में आयोजन की आवश्यकता व उत्सव के साप्तहिक कार्यक्रम पर प्रकाश डाला । उद्घाटन समारोह के साथ आज का कार्य समाप्त हुआ ।
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फा. शु. ६ से ११ तक का कार्यक्रम ~
फा. शु. ६ से ११ तक प्रतिदिन क्रमानुसार परिषदों का आयोजन था । प्रतिदिन के एक -२ प्रमुख विद्वान सभापति थे । फा. शु. ६ को सन्त साहित्य परिषद् हुई । इसका सभापतित्व वेद दर्शनाचार्य पंडित प्रवर स्वामी गंगेश्वरानन्द जी महाराज उदासीन ने सुशोभित किया । इस दिन व्यायाम प्रदर्शन भी हुआ । जिसे देखकर सभी दर्शकों के मुख से धन्यवाद शब्द निकल रहा था ।
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द्वितीय दिन फा. शु. ७ को वाणी समीक्षा परिषद् हुई । इस दिन का सभापतित्व हिन्दी वाचनालय के संस्थापक संगरिया मंडी जाट स्कूल के प्रवर्द्धक एकान्त कर्मठ महात्मा स्वामी केशवानन्द जी ने सुशोभित किया । दोनों दिन व्याख्याताओं में स्वामी सर्वानन्द जी महाराज उदासीन व व्याकरण साहित्य वेदान्ताचार्य स्वामी सुरजनदासजी प्रधानाध्यापक श्रीदादू महाविद्यालय जयपुर प्रमुख थे ।
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उभय महानुभावों ने क्रमश: सन्त साहित्य पर व वाणी समीक्षा का बहुत ही गवेषणा पूर्ण ढंग से विवेचन किया । संत साहित्य की धारा का वैशिष्ठ क्या है ? श्रीदादूजी महाराज की वाणी में प्रतिपादित विषयों का संकलन किस प्रकार किस रुप में हुआ है, इसका विशद वर्णन मननीय था ।
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उभय सभापतियों के भाषण तो उनके अनुरूप होने ही थे । सभा का आयोजन मध्यो काल में १ बजे से ४ बजे तक का था । श्रोताओं की उपस्थिति प्रतिदिन ४ हजार से ऊपर ही होती थी । षष्ठी की रात्रि को भजन उपदेश व निबन्ध प्रवचन हुआ । सप्तमी की रात्रि को नवयुवक मंडल का अधिवेशन हुआ ।
(क्रमशः)

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