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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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समारोह के कार्यकर्ता ~
वैसे इस समारोह को संपन्न करने में सम्पूर्ण दादूपंथी महात्माओं ने तन मन धन से भाग लिया था । गृहस्थ साधु भी बहुत बडी संख्यामें सकुटुम्ब आये थे । फिर भी समारोह का विशेष भार जिन पर था, उनका श्रम और प्रयास अधिक ही था । समारोह की निर्विध्न पूर्ति का विशेष श्रेय पूज्य अनन्त श्री आचार्य रामलाल जी महाराज को है ।
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उन्होंने आरंभ से अन्त तक इस कार्य में सर्वदा उचित सहयोग प्रदान किया । दूसरे स्वामी मंगलदासजी महाराज श्री दादू महाविद्यालय जयपुर तो चंदा से लेकर आदि सभी कार्यों में परिश्रम करते रहे थे । उनका परिश्रम सबसे अधिक था । वैद्य जयरामदास जी भिषगाचार्य जयपुर समारोह के मंत्री थे । उनपर तो इस कार्य का प्रधान भार था ही ।
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भंडारी हरिराम जी दादूद्वारा नारायणा । महन्त रामूदासजी रामोला । नारायणा की स्थानीय व्यवस्थाओं की पूर्ति अधिकांशत: आप ही से संपन्न हुई थी । भोजन की व्यवस्था का भार वहन महन्त चैन सुखजी डीडवाणा, सुखरामदास जी जमात निवाई ‘चांवडया’ आदि महानुभावों ने किया ।
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सभाओं के आयोजनादि तथा विचार संबन्धी कामों की पूर्ति में महन्त मनीराम जी कलानोर, स्वामी दयानिधि जी ॠषिकेश, स्वामी कृपारामजी भिवानी, स्वामी गिरधरानन्दजी दादरी प्रमुख थे । अतिथियों के आने, जाने ठहराने आदि की व्यवस्था की पूर्ति वैद्य रामदेवजी सेलू, वैद्य हरिश्चन्द्र जी किशनगढ, वैद्य कानदासजी चुरु ने की ।
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‘‘दादू वीरदल’’ के संपूर्ण सदस्य व उनके प्रमुख स्वामी गिरधरानन्दजी का शारीरिक श्रम सम्बन्धी सहयोग सभी कामों को मिलता था । आयोजन के श्रम संबन्धी संपूर्ण कामों की पूर्ति इसी विभाग द्वारा संपन्न हुई थी । भोजन कराने की पूर्ति का श्रेय भी ‘दादू वीरदल’ के वीरों को ही है । पंडाल निर्माण, पंडाल समाप्ति, अतिथियों की परिचर्या, जुलूस की व्यवस्था, सभा आदि के समय बैठाने की व्यवस्था ये सब इसी विभाग द्वारा पूरे हुये थे ।
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वैद्य गुलाबदासजी, स्वामी सुरजनदासजी, स्वामी केशवदासजी, स्वामी कानदासजी, भजनदासजी, महन्त मनसारारामजी बुरहानपुर, वैद्य श्रवणदासजी, लाघुरामजी जमात उदयपुर, जोधारामजी, तपस्वी मानदासजी, केशरदासजी जमात उदयपुर, भूरारामजी देवास, स्वामी चेतनानन्दजी रत्नगढ, मुखरामजी स्वामी की ढाणी, ये सब सहायक कार्य कर्ता थे । इनमें से बहुतों को तो कभी कभी दिन रात कार्य में लगना पडता था ।
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और भी अनेक महानुभावों ने इस कार्य में अत्यन्त भाग लिया था । उनके श्रम और सहयोग से ही इसकी यथावत पूर्ति हुई थी । स्वामी गिरधरानन्दजी ने ‘दादू वीरदल’ के सफल संचालन के साथ साथ सफाई के लिये भारी प्रयास किया था । उनके अथक श्रम से ही इतने समुदाय के एकत्रित होते हुये भी स्वच्छता का सम्यक् संरक्षण हो सका । यदि वे इतनी सतर्कता से इस ओर ध्यान न देते तो स्वच्छता का संरक्षण कठिन था, जिसकी सर्वतोपरि आवश्यकता थी ।
(क्रमशः)

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