सोमवार, 22 जून 2026

"नाद ब्रह्म : सृष्टि का मूल स्रोत"

🪷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🪷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*साभार ~@Subhash Jain*
.
*दादू शब्द अनाहद हम सुन्या,*
*नखसिख सकल शरीर ।*
*सब घट हरि हरि होत है, सहजैं ही मन थीर ॥*
================
"नाद ब्रह्म : सृष्टि का मूल स्रोत"
---------
"नाद ब्रह्म" हिंदू दर्शन, वेदांत, योग और भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक बहुत गहरी और महत्वपूर्ण अवधारणा है। इसका शाब्दिक अर्थ है — "नाद ही ब्रह्म है" या "ध्वनि/शब्द ही परम सत्य/ईश्वर है"।

सरल भाषा में समझें~
पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति, संचालन और अस्तित्व ध्वनि/कंपन (वाइब्रेशन) से हुआ माना जाता है। जैसे आधुनिक विज्ञान कहता है कि सब कुछ ऊर्जा और कंपन है, वैसे ही प्राचीन भारतीय ऋषियों ने इसे नाद के रूप में देखा और कहा कि यह नाद ही परम ब्रह्म है।

मुख्य दो प्रकार के नाद~
--------
1.आहत नाद —
जो सामान्य ध्वनियाँ हैं, जो किसी आघात/टकराव से बनती हैं (जैसे तबला बजाना, बोलना, संगीत वाद्ययंत्र)।
---------
2.अनाहत नाद (या अनहद नाद) —
यह बिना किसी आघात के, स्वतः होने वाली दिव्य ध्वनि है। इसे कोई कान से नहीं सुन सकता जब तक मन बहुत शांत और एकाग्र न हो जाए। यह शब्द ब्रह्म या नाद ब्रह्म का मूल रूप है।

योगी गहन ध्यान, नादयोग या शब्द साधना से इस अनाहत नाद को सुनते हैं। इसे विभिन्न रूपों में वर्णित किया जाता है जैसे:
ॐ की मूल कंपन
घंटी, शंख, वीणा, झंकार, तुंकार जैसी सूक्ष्म ध्वनियाँ अंत में यह निर्गुण ब्रह्म में विलीन हो जाती है।

महत्व क्या है?

सृष्टि का मूल —
वेदों और उपनिषदों में माना गया है कि सबसे पहले ॐ(प्रणव) की ध्वनि हुई, उसी से सारा जगत उत्पन्न हुआ।

ईश्वर प्राप्ति का मार्ग —
नादयोग के द्वारा अनाहत नाद का श्रवण करके मनुष्य ब्रह्म में लीन हो सकता है।

संगीत का आधार —
भारतीय शास्त्रीय संगीत इसी सिद्धांत पर टिका है। संगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि ब्रह्म प्राप्ति का साधन माना जाता है।

आधुनिक कनेक्शन —
आज क्वांटम फिजिक्स भी कहती है कि सब कुछ कंपन/वाइब्रेशन है — यह नाद ब्रह्म की बात से बहुत मिलता-जुलता है।

प्रसिद्ध वाक्य~
नादं ब्रह्मेति — नाद ही ब्रह्म है।
शब्दाद्वैतवाद — शब्द ही ब्रह्म है, जगत शब्दमय है।

संगीतरत्नाकर जैसे ग्रंथों में लिखा है: "नाद रूपं परं ब्रह्म"।

संक्षेप में ~
नाद ब्रह्म का अर्थ है कि ईश्वर ध्वनि/कंपन के रूप में सर्वव्यापी है और उसी से सारी सृष्टि बनी है। गहन साधना से जब हम बाहरी ध्वनियों को पार करके अनाहत नाद सुनते हैं, तो हम ब्रह्म को सीधे अनुभव कर लेते हैं

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें