🪷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🪷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*कहो, क्यों जन जीवै सांइयां ?*
*दे चरण-कँवल आधार हो ।*
*डूबत है भव-सागरा,*
*कारी करो करतार हो ॥*
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विनती ॥
राखि ले हो राम देवा ।
हूँ बहतौ साद करौं हो, देवा इहिं भौजल मांहि डरौं हो ॥टेक॥
भौ जल भरिया सागरा, मोहि झकोला देइ ।
तुम्ह बिहूणाँ रामजी, मुनैं कोई काढि न लेइ हो ॥
भौ सागर मैं डूबताँ रे, कासौं करौं पुकार ।
सो मूनैं सूझै नहीं, कोइ तुम बिण थांभणहार हो ॥
काल नदी का घाट मैं, केता डूबा आइ ।
जे तूँ काढै केसवा, तो पारि परोहन जाइ हो ॥
तेरी भगति परोहण भौजला, मोहि चढ़ाइ किन लेइ ।
बषनौं डूबै देखताँ, तूँ डूबण मति देइ हो ॥१६१॥
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हे रामजी ! मुझे रख ले ! मैं इस संसारसागर में बहता हुआ अत्यधिक डर रहा हूँ कि पता नहीं मैं इसी में डूब मारुंगा अथवा इसको पार कर लूंगा । अतः समय रहते ही मैं दीनतापूर्वक करुणप्रार्थना करता हूँ कि हे रामजी ! तू मुझ डूबते हुए को डूबने से बचा ले ।
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यह संसार रूपी सागर विषयभोग रूपी जल से पूर्णतः भरा हुआ है और मुझे बार-बार धक्का देकर = ललचाकर डूबाने का प्रयतन करता है । हे रामजी ! तुम्हारे अतिरिक्त मुझे और कोई संसार-सागर से निकालेगा नहीं, निकाल सकता नहीं । भवसागर में डूबता हुआ मैं किससे पार करने के लिये प्रार्थना करूँ । मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है क्योंकि आपके बिना भवजल में डूबते हुए को पकड़कर बाहर निकालने वाला और और नहीं है ।
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इस काल रूपी नदी के घाट पर कितने ही डूब चुके हैं । अतः हे केशव ! तू यदि मेरी धँसी हुई नैया को संसार सागर में से निकाल देगा तो वह निश्चय ही पार हो जायेगी । हे केशव ! मुझ भवसागर में बहते हुए को अपनी भक्ति रूपी नाव पर क्यों नहीं चढ़ा लेता है । बषनां को अपने सामने ही डूबता देखकर डूबने मत देना ॥१६१॥

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