🪷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🪷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*आपा पर सब दूर कर, राम नाम रस लाग ।*
*दादू अवसर जात है, जाग सकै तो जाग ॥*
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सुमिरण ॥
हरि भजि लाहौ लीज्यौ रे ।
थारौ जनम सुफल सौ होइ रे । तूँ अहलौ यौंही न खोइ रे ॥टेक॥
लाहौ साधाँ सेवियाँ रे, लाहौ भगति कियाँ ।
जीवनि मुकति फल प्रामियें, हरिजी को नाँव लियाँ ॥
साधाँ सेती गोठडी रे, कोटि कटै अपराध ।
धनि र दिहाड़ौ आज कौ, म्हारै द्वारै आया साध रे ॥
धन जोबन सब पाहूणौं रे, आइ मिल्या दिन दोइ ।
घिरती फिरती छाँहड़ी, जाताँ बार न होइ ॥
नैणाँ बैणाँ सरवणाँ रे, रसना रामइयौ गाइ ।
जनम सुफल करि आपणैं, बषनां बिलँब ल लाइ ॥१६६॥
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परात्पर-परब्रह्म-परमात्मा का अहर्निश भजन करके मनुष्य जन्म मिलने का लाभ लीजिये रामभजन करने से हे मनुष्य ! तेरा जन्म सफल हो जायेगा । तू इसे यों ही व्यर्थ मत गँवा । साधुओं का सत्संग करने में लाभ है । रामजी की भक्ति करने में लाभ ही लाभ है । हरिजी का नाम-स्मरण करने से जीते जी ही मुक्ति = जीवन्मुक्ति की प्राप्ति हो जाती है । साधु-संतों से गोष्टि करने पर करोड़ों अपराध कट जाते हैं ।
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बषनां जी कहते हैं, आज का दिन धन्य है कि मेरे द्वार पर साधु-संतों का आगमन हुआ है । धन, यौवन आदि सभी अतिथि तुल्य हैं जो जीव को कुछ समय के लिये मिले हैं । ये ठीक उसीप्रकार अस्थाई संगी-साथी हैं जैसे छाया घिरती फिरती =आती-जाती है, इन्हें नष्ट होते समय नहीं लगता । नैनों से संतों के दर्शन करके, श्रवणों से रामजी का नाम सुनकर तथा रसना से रमतीराम का गायन करके हे मनुष्य ! अपना मनुष्य जन्म सफल कर । बषनां कहता है, इस काम को करने में तनिक सी भी देरी मत कर ॥१६६॥

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