🪷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🪷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*सांई दीया दत घणाँ, तिसका वार न पार ।*
*दादू पाया राम धन, भाव भक्ति दीदार ॥*
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परिचय आत्मसाक्षात्कार ॥
तहाँ मन भयौ रे अड़ोल ।
म्हारै मनि बसियौ रे, गुर म्हारा कौ बोल ॥टेक॥
थित्ति मांहि थित्ति पाई, अगम थी सो गुरि बताई ॥
तहाँ लागौ मंन लाई, तहाँ उपजै नहिं और काई ॥
चंचल था निहचल कीया, जाइ था सो फेरि लीया ।
अैसा गुरि उपदेस दीया, तिहिं आलंबनि लागि जीया ॥
सबद माँहैं संतोष पाया, मंन था सो तहाँ लाया ।
कह्या था सो हाथ आया, राम राम सहजि समाया ॥
जहाँ गुरि थापना थापी, जप करै जहाँ पंच जापी ।
प्रगट्यौ तहाँ आप आपी, निरखि बषनां सकल ब्यापी ॥१६७॥
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मेरे मन में मेरे गुरुमहाराज के उपदेश रूपी बोल बस गये हैं जिनको साधने से उस शब्दस्वरूपी परमात्मा में मेरा मन निश्चल हो गया है । निश्चय मन में थिति = निधिस्वरूप परमात्मा का बोध पाया । बोध पाना सर्वथा अगम्य था किन्तु गुरुमहाराज ने उसको प्राप्त करने की युक्ति बता दी जिससे मुझे बोध हो गया । अब मेरा मन उस अद्वितीय तत्व में लग गया है, जहाँ उसके अतिरिक्त अन्य कुछ सूझता ही नहीं है, उपजता ही नहीं है ।
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मन पहले अतीव चंचल था जिसको निश्चल कर लिया । वह विषयभोगों में दौड़ा करता सो उसे वहाँ से उल्टाकर स्वात्मतत्त्व-चिंतन में लगा लिया । गुरुमहाराज ने “निश्चल मन करके रामजी का स्मरण करना चाहिये” यह उपदेश दिया जिसका आश्रय लेकर ही मैंने स्वात्मतत्त्व का बोध प्राप्त कर जीवन प्राप्त किया है ।
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गुरुमहाराज के उपदेशों को सुनकर ही मैंने संतोषवृत्ति धारण की है और मन को संतोषवृत्ति से जोड़ दिया है । गुरुमहाराज ने जो कुछ कहा था वह मुझे प्राप्त हो गया । राम-नाम में रम कर, रामनाम से एकाकार होकर मैं सहजावस्था में समा गया । गुरुमहाराज ने जिस ब्राह्मीस्थिति की स्थापना की थी अब वहाँ जाप करने वाली पाँचों ज्ञानेन्द्रियाँ जाप करती हैं । उस स्थान में आत्मा ही परमात्मा के रूप में प्रकट हुआ है । बषनां उस सकलब्यापी को देखता है ॥१६७॥

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