शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

खेड़ापा रामस्नेही संप्रदाय

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
*जे जन बेधे प्रीति सौं, सो जन सदा सजीव ।*
*उलट समाने आप में, अन्तर नांही पीव ॥*
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लालदास जी के विषय में वहां यह भी प्रसिद्ध है कि खेड़ापा के रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्तक रामदासजी ने खेड़ापा से आकर मलाणा में एक दिन जागरण किया था । वे रात्री भर उच्च स्वर से गाते रहे थे । इससे भजनानन्दी लालदासजी के भजन में उस रात को विघ्न ही रहा ।
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प्रातःकाल लालदासजी ने भावूदास ब्राह्मण से पूछा~ आज रात्रि भर ऊंचे स्वर से कौन गाता रहा था । भावूदास ने कहा~ खेड़ापा के रामदासजी तीन दिन से यहां आये हुये हैं । आज रात्रि को वामियों के वास में उन्होंने जागरण किया था, अतः वे ही गाते थे । लालदासजी ने भावूदास को कहा~ तुम रामदासजी को मेरे पास बुला लाओ । भावूदास ने जाकर रामदासजी को कहा~ आपको लालदासजी महाराज बुला रहे हैं ।
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रामदासजी भावूदास के साथ लालदासजी के पास आये । तब लालदासजी ने उनको कहा~ रामदास ! जितनी लगन से तुम रात्रि भर ऊंचे स्वर से गाते रहे उतनी लगन से रामजी का भजन करते तो तुम्हारा कल्याण हो जाता और तुम्हारे संग से अन्यों का भी कल्याण होता । लालदासजी का उक्त वचन सुनकर रामदास जी बोले~ फिर आप ही मुझे शिष्य बनाकर रामजी के भजन की मुक्ति बताइये । तब लालदासजी ने कहा~ तुम सिंहस्थल में जाकर हरिरामदासजी के शिष्य हो जाओ ।
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लालदासजी की आज्ञा मानकर रामदास सिंहस्थल में हरिरामदासजी के पास गये । हरिरामदासजी ने उनको शिष्य बनाकर राम भजन में लगा दिया । फिर वे भजन करके उच्चकोटि के संत हो गये थे । उन्हीं से खेड़ापा रामस्नेही संप्रदाय चला है । रामदासजी ने लालदासजी के विषय में कहा भी है~
"लालदास लागा गुरु घाटी, कीन्ही दूर भरम की टाटी ।"
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विराही के संत सुखरामजी भी पहले लालदासजी के सत्संग में जाते थे और उनसे साधन संबन्धी परामर्श भी करते थे । यह विराही की परंपरा के संत भी सुनाते हैं । मलाणा के स्थान में दो संतों से अधिक संख्या नहीं होती है । लालदासजी ने ही ऐसी मर्यादा इसलिये बाँध दी थी कि अधिक होने से भजन में विघ्न पड़ेगा ।
(क्रमशः)

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