*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*साभार सौजन्य ~ “श्रीमद् दादू पंथ प्रकाश”*
*श्रीमद्दादूपीठाधीश्वर(२०) श्री गोपालदासजी महाराज का संक्षिप्त जीवन दर्शन~*
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आपके निरन्तर देशाटन में श्री दादू पंथ से इत्तर अनेक संत सम्प्रदायों- निम्बार्क, कबीर, रामस्नेही, नाथ, उदासीन, जिनी, सन्यासी, वैरागी, प्रभूति, सभी संत, मतानुयायी, पीठाधीश्वर व संत-महंतों के आश्रमों मठों द्वारों में आपका सादर अपूर्व प्रवेश, भेंट, संत-संस्कृति के अनुरूप सर्वथा सम्पृक्त-व्यवहार, ऐतिहासिक व युगानुकूल उच्चादर्श प्रस्तुत करते हैं ।
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आपने मनसा वाचा कर्मणा निरन्तर अहर्निश असंख्य जनों को 'संतमत' में दीक्षित करते हुये निस्सीम व निर्वाध रूपेण विनियोजित किया है तथा शाश्वत-संत-शरणि के अव्याहत पवित्र-प्रवाह में जन-जन को अवगाहित कर उन्हें परम-प्रांजल ज्ञान प्रदान किया है ।
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श्री मद्दादपीठ की जगद्विताय सार्वभौमिकता की संसिद्धि के निमित्त आपने' जगद्गुरुत्व' को व्यावहारिक रूपेण संस्थापित करते हुये 'संत-मत' को सर्वोपरि व सर्वोत्कृष्ट संसाध्य सिद्ध किया है ।
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श्री दादूपंध की मौलिक निहंग-परम्परा व संवैधानिकता को अक्षुण्ण रखने का सत्य-संकल्प लेते हुए जाति वर्ग वर्गातीत 'संत-पथ' को अंगीकार किया । सभी संत-सम्प्रदायों में पारस्परिक सामञ्जस्य व साम्य तथा पीठाधिपतियों की गुरुमत प्रचारार्थ संदर्शित व सम्मान्य अवधारणा को सर्वग्राह्य रखने के उद्देश्य की परिपालनार्थ आपका साग्रह कर्तव्य-बोध तथा सक्रिय योगदान आपकी हार्दिकता को प्रकट करता है । यही मूलभूत *जगद् गुरुत्व* की सार्थक व पूर्ण परिभाषा है. जो पूज्याचार्य चरित्रनायक श्री(पीठाधीश्वर 20) में सिद्धान्ततः विद्यमान है । परिणाम स्वरूप सभी संत समुदाय व पीठों ने आपको *चक्रवर्ती संत-सम्राट* इस गरिमामय सम्मान्य अलंकरण से अलंकृत किया है ।
(क्रमशः)

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