गुरुवार, 9 जुलाई 2026

*ब्रह्मलीन~*

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*साभार सौजन्य ~ “श्रीमद्‌ दादू पंथ प्रकाश”*
*श्रीमद्दादूपीठाधीश्वर(१९)श्री हरिरामजी महाराज का संक्षिप्त जीवन दर्शन~*
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*विभिन्न स्थानों पर चातुर्मास महोत्सव ~*
आप देश के प्राय: सभी महानगरों-नगरों व जहाँ-जहाँ आमंत्रण मिला वहाँ गये तथा जहाँ-जहाँ चातुर्मास आयोजित किये गए, वहाँ जाकर संतमत श्रीदादूवाणी जी तथा आध्यात्म को जन-जन में हृदयस्थ कर पीठ व पंथ की गरिमा को सर्वथा विवर्धित किया । आपके निम्रांकित स्थानों पर “चातुर्मास्य-महा-सत्संगोत्सव” सम्पन्न हुए~
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+ सौंखिया परिवार, जयपुर शहर
+ महरवाल परिवार, ग्राम - आँधी
+ भैराणा मोक्षधाम पालकांजी
+ नयी नाड़ी रामपुरा(टोंक)
+ टांका स्थान भैराणाजी
+ गेटोर ग्राम(जयपुर) दादूद्वारा
+ कलकत्ता महानगर दादूसेवकों द्वारा
+ सोनीपत म.म.श्री भूरादासजी द्वारा
+ इन्दावड़(मेडता) संत भूरादासजी
+ मेड़ता सिटी छत्तरी भक्तों द्वारा
+ ओसियाँ ग्राम रामनारायणजी स्वामी द्वारा(जोधपुर) गीजगढ़ दादूद्वारा में ।
+ भोजपुरा कलां(जोबनेर) संत शीतलदासजी द्वारा
+ निवाई श्री दयालआश्रम निवाई द्वारा
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*धाम का परिष्कार~*
आपने श्री दादूद्वारा धाम के सैकड़ो टूटे-फूटे स्थानों के जीर्णोद्धार का काम प्रारंभ कर उन्हें आधुनिक सुविधाओं - से युक्त संतो व भक्तजनों के आवास योग्य बनाने का संकल्प लिया और संपूर्ण 101 बीघा में फैले हुए दादूधाम की योजनाबद्ध रीति से संरक्षण का श्रीगणेश कर धाम के परिष्कार को गति प्रदान की ।
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*संत साहित्य का संरक्षण~*
दादूसमाज के अनेकानेक स्थानों व धामस्थ असंख्य हस्त लिखित संत-साहित्य को एकत्र कर सुरक्षित करने का जो कार्य गुरुवर्य पूर्वाचार्य श्री ने प्रारंभ किया था उसे आपने मूर्त रूप देकर तदर्थ विशाल प्रदर्शनीकक्ष के निर्माण कार्य सहित संत कृतियों को संरक्षण दिया । साथ ही पुरावशेष दर्शनीय वस्तुओं के संग्रह को लिपिबद्ध तथा आधुनिक रीत्या प्रदर्शित करने और उन्हें जीर्ण-शीर्णता से बचाने के उपाय किये ।
आपने अपने पीठकाल में असंख्य सद्गृहस्थ भक्तों-सेवकों तथा श्रद्धालुओं की श्रृंखला तैयार कर धाम की शोध को विवर्धित किया । साथ ही दीक्षा गुरुमंत्र तथा पांथिक पद्धति से अनुयायिजनों की अगणित संख्या बढ़ाई ।
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*देश-प्रदेश के महान-मनीषियों का आगमन~*
आपके पीठासीन रहते देश की महान् नेत्री श्रीमती इन्दिरा जी गांधी ने मुख्य धामों की गणना में इस गुरुधाम को चुन कर पूजा-अर्चना के साथ आचार्यश्री से आशीर्वाद ग्रहण किया । तथा राजस्थान प्रदेश के लोकप्रियनेता माननीय श्री भैरोंसिंह जी शेखावत ने अनेकों बार धाम दर्शन कर नमन किया व आशीर्वाद लिया ।
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*ब्रह्मलीन~*
आपने ब्रह्मलीन होने से कुछ काल पूर्व ही अपने पीठ के लिए सुयोग्य प्रतिनिधि का विधिवत् चयन कर संभावित सुभविष्य को सुस्थिर कर पीठ व समाज को अपने रहते ही सर्वथा आश्वस्त करते हुए अपना उत्तरदायित्व पूर्ण किया औ अन्तिम समय के व्यामोह से निश्चिंत हो प्रभुचिंतन सद्‌गुरुवंदन तथा समाज भगवान को नमन कर दिनाङ्क श्रावण कृष्ण(एकादशी) सं. 2058 वि. तदनुसार 17 जुलाई सन् 2001 को परब्रह्म में लीन हुये ।

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