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🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
*दादू सब जग दीसै एकला, सेवक स्वामी दोइ ।*
*जगत दुहागी राम बिन, साधु सुहागी सोइ ॥*
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मांदी स्थान के शाखा रूप स्थान- १ मिलकपुर २ बागटा की ढांणी ३ कोटपुतली ४ बहरोड़ ५ विजोरास ६ पावटा ७ बसई ८ पाटन । यह मांदी ग्राम का इतिहास कनिकरामजी स्वामी नारायणा दादूद्वारे वालों ने आत्मरामजी मांदी वालों से प्राप्त करके भेजा था ।
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लालदासजी =गरीबदासजी की परंपरा के स्थान कालख से लालदासजी बीलू के तत्कालीन ठाकुर की प्रार्थना पर १७९० के लगभग आये थे । बीलू का स्थान लालदासजी का ही साधन धाम है । लालदासजी ने बीलू में स्थान बनवाया था । ये अच्छे संत थे ।
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३५ किशनदासजी = मांदी स्थान की शाखा कोटपूतली में प्रथम किशनदासजी सिद्ध पुरुष हुये हैं । उनके भक्त कोटपूतली के वैश्यों ने उनकी प्रशंसा नारनौल के नवाब के आगे की थी । उससे वह नवाब किशनदासजी के दर्शन करने कोट- पूतली आया और किशनदासजी के दर्शन तथा सत्संग से प्रभावित होकर स्थान की सेवा के लिये नवाब ने ४० बीघा भूमि किशनदासजी के भेंट की । कोटपूतली के माली सज्जन के पुत्र नहीं होता था । वह वृद्ध भी हो गया था । किन्तु उसके मन में पुत्र प्राप्ति की अति उत्कट अभिलाषा थी ।
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वह किशनदासजी की शरण में आया और पुत्र प्राप्ति के लिये किशनदासजी से प्रार्थना की । तब किशनदासजी ने कहा~ तेरे पुत्र हो जायगा किन्तु दूसरा पुत्र हो वह हमारे चढ़ाना होगा । उसने मान लिया । फिर उसके दो पुत्र हुये । दूसरा पुत्र किशनदासजी को भेंट कर दिया । वही किशनदासजी का उत्तराधिकारी बना । उनका नाम रामबगसदासजी था ।
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इस प्रकार १- किशनदासजी २- रामबगसदासजी ३- गंगादासजी ४- मोहनदासजी ५- अमरदासजी वर्तमान हैं । इनमें मोहनदासजी अच्छे वैद्य हुये हैं । इन्होंने गोपालदासजी बुवाणी वालों से भी आयुर्वेद संबन्धी अभ्यास किया था तथा कलकत्ता में औषधालय भी खोला था । ये दादूबाग कनखल में आते जाते थे । मैंने इनके दर्शन किये हैं ।
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गरीबदासोतों के स्थान = सामान्य रूप से गरीबदासोत कहते हैं ~हमारे मुख्य स्थान ३६ हैं । १२=मारवाड़ में, १२- शेखावटी में और १२ काठेड़ा में हैं । मुझे जो ज्ञात हुये उनके नाम मैं नीचे दे रहा हूं । देखिये- १-नारायणा दादूधाम, २- गिधाणी, ३- पिलास, ४- छापरी, ५- बिलू(कालख से आये), ६- नलू, ७- चूरू, ८- मलाणा, ९- देवतड़ा, १०- चामू, ११-चैराई(पोकरण फलोदी)महालाणी प्रदेश, १२- रातड़िया, १३- जोधपुर नागौरीगेट तोलारामजी का अस्थल, १४- राजारामजी का स्थल, १५- खांड़ा पलसा घोसियों के मोहल्ले में जो दादू पंथियों के नोहरे के नाम से प्रसिद्ध है, १६- खाचरियावास, १७-भूरडों का वास, १८- वेन्या का वास, १९- रामगढ़(दांता), २०-चंदेरया का वास, २१- मोटलास, २२- वाय, २३- पचार, २४- रेणवाल, २५- रुलाणा, २६- तिकूटया(रामगढ़), २७- कालख, २८- कोटपूतली, २९- बहरोड़, ३०- मांदी, ३१- मलिकपुरा, ३२- बाठाटाकी ढांणी, ३३- विजोरास, ३४- पावटा, ३५- वसई, ३६- पाटन, ३७- मारोठ, ३८-ओसियां, ३९- कासली, ४०- सीतापुरा, ४१- जोबनेर, ४२- मांलामें, ४३- उणियारा में, ४४- नयाग्राम में, इत्यादिक स्थान गरीबदासोतों के हैं ।
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उक्त सभी स्थानों में अच्छे २ संत महात्मा भजनानन्दी, योगी, परोपकारी, दयालु, विरक्त, विद्वान् , ब्रह्मज्ञानी, भगवद् विरही, प्रतिष्ठित, दीनवत्सल, निरभिमानी परमनम्र, क्षमाशील, परम विवेकी इत्यादिक विशेषताओं वाले अनेक संत हुये हैं किन्तु भूत काल के सब महान् संतों के संपूर्ण चरित्र मिलना इस समय सुगम नहीं है । जिन जिन के मुझे मिल सके उन २ के मैंने संक्षिप्त रूप से दे दिये हैं । इति श्री द्वितीय अध्याय समाप्तः

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