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🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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*दादू सोई सेवक राम का, जिसे न दूजी चिंत ।*
*दूजा को भावै नहीं, एक पियारा मिंत ॥*
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बुधरामजी = जयतरामजी महाराज की शिष्य परम्परा में भोजपुरा स्थान की परम्परा इस प्रकार है~ १- बुधरामजी, इनके शिष्य दयारामजी गुढा ग्राम में अपना साधन धाम बनाकर भजन करने लगे । दूसरे मयारामजी भोजपुरा में ही भजन करते रहे । उनके शिष्य १ - नानकरामजी उनके २ - महादेव देवदासजी उनके ३- रामधनदासजी ४- भोलारामजी ५- वक्षीरामजी ६- बालदासजी ७- हरिरामजी ८- शीतलदासजी वर्तमान हैं । यही भोजपुरा स्थान की परम्परा है ।
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इस परम्परा के आदि संत बुधरामजी परमविरक्त परोपकारी संत थे । वे वर्तमान भोजपुरा ग्राम से लगभग १॥मील उत्तर में खीरवा ग्राम के जंगल में एक पर्णकुटी में रहते थे । तथा निरन्तर निर्गुणराम का चिन्तन करते हुये पशु पक्षियों तथा पथिकों को जल पिलाना रूप परोपकार करते रहते थे । आपकी इस परोपकार वृत्ति से प्रभावित होकर एक श्रद्धालु जवानीराम जाट भक्त ने अपने खेत में से २४ बीघा भूमि बुधरामजी के भेंट कर दी और उस भूमि में एक पक्का कुआ तथा एक खेल भी बनवादी ।
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वहां रहकर बुधरामजी अपनी उक्त प्रकार की सेवा रूप परोपकार करने लगे । वह प्याऊ अब तक चलती आ रही है । बुधरामजी का अन्तिम समय निकट आने पर अपने सेवकों को आज्ञा दी कि मेरा शरीर जाने वाला है । प्राण पिण्ड का वियोग होने पर शव को घोड़े की पीठ पर बांध देना । वह घोड़ा जहाँ रुक जाय वहां ही संस्कार करके समाधि बना देना । सेवकों ने वैसा ही किया ।
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वर्तमान भोजपुरा ग्राम के स्थान के सम्मुख गोशाला में बुधरामजी की समाधि विद्यमान है । सेवक लोग अब भी समाधि को पूजते हैं । समाधि बनने के पश्चात् समाधि के पास कच्चा स्थान रूप दादूद्वारा बना । बुधरामजी के सेवक ब्राह्मण और जाटों के सैकड़ों परिवार थे । बाद मैं इस स्थान के सेवक राजपूत भी बहुत बन गये । सेवक लोग बच्चों के जडूला आदि संस्कार बुधरामजी की समाधि पर आकर ही करते हैं ।
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बुधरामजी के शिष्य मयारामजी भोजपुरा रहे और दूसरे शिष्य दयारामजी ग्राम में चले गये । उनकी परंपरा वहां चली । उनकी परंपरा में वर्तमान में भजनदासजी वैद्य पुराणी बस्ती जयपुर में हैं । मयारामजी की शिष्य परम्परा भोजपुरा में भोलारामजी संपत्तिशाली महापुरुष हुये । भोजपुरा में पक्का दादूद्वारा भोलारामजी ने ही बनाया था । भोलारामजी के समय वहां का आसपास का क्षेत्र खेती न होने के कारण अर्थ संकट में पड़ गया था, तब निकटस्थ जनता तथा जोबनेर, मंढ़ा, भैसलाना भादवा, रोझडी आदि के जागीरदार ठाकुरों कों भी भोलारामजी ने आर्थिक सहयोग दिया था । वे प्रारब्धी महापुरुष थे ।
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इन परंपरा में हरिरामजी भी परोपकारी, समाज सेवक साधु थे । आप नारायणा दादूधाम दादूद्वारे के भंडारी भी रहे थे । आप समाज के सभी अच्छे कार्यौं में सहयोग देते थे । हरिरामजी के शिष्य वैद्य शीतलदासजी वर्तमान हैं । नारायणा से गोविन्ददासजी के शिष्य मौजीरामजी साखून गये । उनके शिष्य बुधरामजी के समय में जयपुर पुरानी बस्ती का स्थान बसाया गया । उसमें रामनारायणजी, वल्लभदासजी, हरिरामजी, भजनदासजी वर्तमान गाड़ी वालों का मौहल्ला जाट के कुए का रास्ता, जयपुर पुराणी बस्ती के स्थान में रामनारायणजी महान् वैद्य हुये ।
(क्रमशः)

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