*🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏*
*🌷卐 सत्यराम सा 卐🌷*
*साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi @Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
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*२६. भजन प्रताप का अंग ~५/८*
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*अति गति१ सूधा२ नाम था, सोइ लिया निज दास ।*
*रज्जब छाना३ क्यों रहे, वाणी सुयश सुवास ॥५॥*
मोक्ष१ का सरल२ मार्ग नाम चिंतन ही था, जो भी भगवन का निजी भक्त हुआ है, उसने वही नाम चिंतन रूप मार्ग अपनाया है, अत: वह छिपा३ हुआ कैसे रह सकता है ? उसकी वाणी रूप सुगंध उसके यश को सभी लोकों में फैला देती है ।
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*तन मन तिली१ सामान है, नाम निरंजन फूल ।*
*जन रज्जब सौंधा२ भये, मिल४ सौंधा के मूल३ ॥६॥*
तन मन तो तिलों१ के सामान हैं और निरंजन राम का नाम फूलों के सामान है, जैसे फूलों के संग से तिलों का तेल सुगन्धित२ होजाता है और सुगंध के मूल्य३ में मिलता४ है, वैसे ही निरंजन राम के नाम चिंतन से प्राणी के तन मन भक्त हो जाते हैं और भक्त के सामान सत्कार के पात्र होते हैं ।
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*अठार भार विधि आदमी, चन्दन चिन्तन नाम ।*
*रज्जब सकल सुगंध ह्वै, धन्य संतन विश्राम ॥७॥*
मनुष्य तो अठारह भार वनस्पति के समान है और नाम का चिन्तन चन्दन के समान है, जैसे चन्दन के संग से वनस्पति सुगंधयुक्त हो जाती है, वैसे ही नाम चिन्तन से मनुष्य भगवद् भक्ति से युक्त हो जाते हैं । संतों को विश्राम देने वाले राम नाम को धन्य है ।
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*मन इन्द्रिय पति आतमा, तरुवर नींम्ब स्वरूप ।*
*हरि चितवन चन्दन परसि, रज्जब पलटि अनूप ॥८॥*
मन इन्द्रियों के स्वामी जीवात्मा का स्वरूप नीम्ब वृक्ष के समान है, हरि चिन्तन चन्दन के समान है । जैसे चन्दन की सुगंध से नीम्ब बदल जाता है, वैसे ही नाम चिन्तन से जीवात्मा जीवात्व भाव बदलकर उपमारहित ब्रह्म-भाव को प्राप्त होता है ।
(क्रमशः)

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