शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

दीपराम जी

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम:  卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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*दादू जे साहिब कौं भावै नहीं,*
*सो हम थैं जनि होइ ।*
*सतगुरु लाजै आपणा, साध न मानैं कोइ ॥*
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दीपराम जी = दीपरामजी हरजीरामजी गुढ़ा वालों के शिष्य थे । आप भी भजनानन्दी महान् तितिक्षु संत थे । दीपरामजी के समय में एक राजपूत पहाड़ी पर खैरी काटने लगा, तब दीपरामजी ने कहा~इस झाड़ी के खैरी क्यों काटते हैं । यह बाबाजी हरजीरामजी के नाम से रक्षित है । उस राजपूत ने कहा~ चलरे मोडे, यह तो कटेगी । तब दीपरामजी महाराज वहां से चल दिये । उनके चले जाने के पश्चात् भारी हिमपात और जोर से आँधी आई । सब शाखें नष्ट हो गईं  । फिर ग्राम के सब लोग दीपरामजी के पास गये । खैरी काटने वाले राजपूत ने क्षमा माँगी फिर अति अनुनय विनय करके दीपरामजी को लौटा कर आश्रम लाये । दीपरामजी महान् संत थे । 
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जयरामदासजी =  जयरामदासजी उक्त दीपरामजी के ही शिष्य थे । खंडेलावाटी में डूक्यागोवटी के पास बड़सींगपुरे में हुये हैं । कुकणवाली ग्राम में भी उनका जाना आना था । आप भी अपने गुरुदेव दीपरामजी के समान ही भजनानंदी थे । त्यागी तथा तत्त्ववित् महात्मा थे । दादूवाणी का विचार करते रहते थे । निर्गुण ब्रह्म की उपासना करते थे । 
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५ तोलारामजी ~ तोलारामजी गोड़जी का गुढ़ा में ही रहते थे । हरजीरामजी के समकालीन ही थे । हरजीरामजी को भी कभी २ सचेत किया करते थे । परमविरक्त भजनानन्दी थे । आप भविष्य की बात भी जान जाते थे । खेतड़ी नरेश की मृत्यु की बात आपने हरजीरामजी को पहले ही कह दी थी और कहा~ यदि अपनी आयु देकर जीवित करना हो तो जाना और जीवित करने का सामर्थ्य नहीं हो तो नहीं जाना । जीवित नहीं कर सकोगे तो साधुओं की बदनामी होगी । 
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अन्य भी हरजीरामजी और तोलारामजी की  गोष्टीकी बात गौड़जी के गुढ़ा में प्रचलित है । वहां के लोग तोलारामजी को हरजीरामजी का गुरु भाई ही बताते हैं । वहां तोलारामजी की बगीची प्रसिद्ध है : मैं वहां गया था तब शौच स्नानादि के लिये तोलारामजी की बगीची पर ही गया था । बगीची में तोलारामजी के चरणचिन्ह भी हैं किन्तु चरणों की पूजा करने वालों की कृपा से अक्षर पढ़ने लायक नहीं रहे अतः समय का ठीक ज्ञान नहीं हो सका । 
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हरजीरामजी की शिष्य परम्परा के संत किशनदासजी ने अपनी संपत्ति चौथका खीचड़ा नारायणा दादूद्वारा के मेले के समय बनता रहे, इसलिये नारायणा के वर्तमान आचार्य को दे थी । आचार्य कृष्णदेवजी महाराज की शिष्य परम्परा के स्थान~१- गौड़जी का गुढ़ा २- मेड़ता शहर ३- जयपुर शहर घाट चौकड़ी रास्ता मोतीसिंह भौमिया ४- नारायणा ५- बोराबड । इति श्री तृतीय अध्याय समाप्तः ३ । 
(क्रमशः)

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