*🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏*
*🌷卐 सत्यराम सा 卐🌷*
*साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi @Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
.
*२५. नाम निरूप आदम अकलि का अंग ~५/८*
.
*आदम ने अचरज किया, नाम सु दीपक राग ।*
*तिमिर हंत सो उर धरहु, रज्जब जागहिं भाग ॥५॥*
मानव ने जो परमात्मा के जो नाम रक्खे हैं, वे दीपक राग के समान है, दीपक राग गाने से जैसे दीपक जग कर अंधेरा दूर होता है, वैसे ही नाम-स्मरण से हृदय का अज्ञान रूप अँधेरा दूर होता है, अत: नाम को सदा हृदय में रक्खो, तुम्हारा भाग्योदय होगा ।
.
*सांकल आतम राम को, नाम रूप निज जान ।*
*देख अबन्धूं बन्धना, जन रज्जब हैरान ॥६॥*
आत्माराम को बाँधने के लिये एक मात्र निज नाम-स्मरण रूप जंजीर ही समर्थ है, नाम-स्मरण रूप जंजीर बन्धन रहित परमात्मा को भी बाँधने वाला है, यह देखकर हमें बड़ा आश्चर्य होता है ।
.
*मन उनमन१ मूसल उभय, हाथा जोड़ी नांउ ।*
*बंध अबन्धूं बंदगी, हिकमत२ पर वलि जांउ ॥७॥*
मूसल से धान कुटते समय दोनों हाथ अपने आप मिल जाते हैं, वैसे ही नाम-स्मरण के द्वारा मन समाधि१ अवस्था में जाता है तब जीव और ब्रह्म दोनों मिल जाते हैं । स्मरण रूप भक्ति तत्त्वज्ञान द्वारा बन्धनयुक्त जीव और बन्धन रहित ब्रह्म दोनों को एक कर देती है, ज्ञानी मानव के उस तत्त्व-ज्ञान२ की हम बलिहारी जाते हैं ।
.
*नाम सभी संतों धरे, गहि गहि गुण उनमान ।*
*यहु रज्जब इस ओर तें, सुमिरन का अस्थान ॥८॥*
परमात्मा के सभी नाम संतों के गुण, कर्म को ग्रहण करके तथा स्वरूप का अनुभान करके रक्खे हैं । इस साधक अवस्था की ओर से परब्रह्म के चिन्तन का मुख्य स्थान नाम ही है, अर्थात नाम का आश्रय लेकर के ही स्मरण किया जाता है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें