शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

*रामभजनजी =*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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*जीवित मृतक साधु की, वाणी का परकास ।*
*दादू मोहे रामजी, लीन भये सब दास ॥*
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*विदुरवाणी =* 
संत विदुरजी की वाणी भी है । मुझे बनादासजी खालसा के संत नारायणा दादूधाम वालों ने कुछ पत्र दिये थे । उनके अन्त में २१८ पद्य संख्या लिखी है । इनमें दोहे, सवैया, कवित्त आदि छंद हैं । यहां एक उदाहरण दिया जाता है, देखिये—कवित्त- 
सत्य है सिद्धांत वाको झूट ही बतावे नर, 
उर में अज्ञान जाके ज्ञान नहीं होत है । 
वाद रु विवाद करे सत्य को न माने सत्य, 
मन है मलीन मूढ़ खात बहु गोत है ॥ 
कामना के भाव से भजनकर विपरीत, 
निज रूप लखे बिना जीवन को खोत है । 
विदुर विचार कहै वाको दुख मिटे कैसे, 
सतगुरु महर करे मन पाप धोत है ॥३१॥ 
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१७ वें *आचार्य रामलालजी* के खालसे में कोई नहीं है । इनका कोई शिष्य स्थानधारी नहीं हुआ है । इससे इनका खालसा नहीं चला । १८ वें *आचार्य प्रकाशदेवजी* के शिष्य तो कई हुये थे किन्तु स्थानधारी नहीं होने से पृथक परंपरा के रूप में नहीं चली । १९ वें *आचार्य हरिरामजी* वर्तमान में हैं । अतः इनके खालसे के विषय में अभी तो कुछ लिखने का प्रसंग ही नहीं है । 
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*रामदासजी =*
रामदासजी मसकीनदासजी के थांमे के स्थान जोधपुर में दीक्षित हुये थे । आप अच्छे विद्वान् संत थे । जोधपुर में आपके समान आपके समय में साधुओं में अन्य कोई विद्वान् नहीं था । आप अच्छे भजनानन्दी महात्मा हो गये हैं । 
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*रामभजनजी =* 
सनोद्या(खंडेल के पास) में निरंजनदासजी खालसा वालों के शिष्य रामभजनजी अच्छे भजनानन्दी संत सनोद्या के एक नाडा पर हुये हैं । वह नाडा रामभजनजी का ही कहलाता है । भैसलाणा में अमृती के वास में रामभजनजी के भजन करने की मंढी है । सनोद्या में नाड़ा पर आपकी समाधि है । समाधि को जनता मानती है, धडी पूली आती है । 
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मंढा के ठाकुर भीमसिंह ने रामभजनजी के भजन साधन से प्रभावित होकर नाडा(तालाब) के लिये ६ बीघा और ११ विसवा भूमि उनको दी थी । वहां ही स्थान कृषि योग्य एक कूप है । सिद्ध संत रामभजनजी नाडा से एक दिन भेसलाणा जा रहे थे । मार्ग में उक्त कूप आया तो उसके किसानों को बोले भाई दोपहर के समय बैलों को खोल दिया करो । किसान बोले- आप तो साधु हैं किन्तु हमारे पीछे कुटुम्ब लगा है, इससे खोलना नहीं बन सकता । । तब रामभजनजी ने कहा—अच्छा । फिर वहां अपना हाथ की तूंबी का जल डालकर भैंसलाणा चले गये । 
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थोड़ी देर में कूप का पानी सूख गया । तब वे किसान नाडा पर स्थान में गये । वहां के संतों से कहा । संतों ने कहा- उधर रामभजनजी आये थे क्या ? किसान बोले आये थे और कहा था कि दोपहर में कूप बन्द करके बैलों को विश्राम दिया करो किन्तु हमने उनकी बात नहीं मानी थी । तब संतों ने कहा~ फिर तो उनके पास ही जाओ । फिर किसान भैंसलाणे गये और प्रार्थना की । तब रामभजनजी ने कहा—दोपहर में सूखेगा आगे पीछे नहीं सूखेगा । फिर वैसा ही होता था । नाडा पर चरण चौकी घासीरामजी वि. सं. १९२५ कार्तिक सुदी ९ की है । निरंजनदासजी और अर्जुनदासजी की चरण चौकी वि. सं. १९३९ की है । निरंजनदासजी के शिष्य रामभजनजी थे । 
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*भक्तावरदासजी* 
भक्तावरदासजी घासीरामजी के शिष्य थे । ये महान् तपस्वी थे । ये एक घंटा प्रतिदिन ऊंधे झूला करते थे । नाडा का स्थान में वि. सं. १९७४ तक शिवरामजी थे । तब तक अच्छी स्थिति में था । वि. सं. २०३१ में मैं वहां गया था तब भी एक साधु वहां था । वह भिक्षा से निर्वाह करता था और कुछ समाधि पर आने वाले यात्रियों से उसे प्राप्त होता था । 
{इति श्री पंचम अध्याय समाप्तः ५} 
(क्रमशः) 

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