*🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏*
*🌷卐 सत्यराम सा 卐🌷*
*साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi @Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
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*२६. भजन प्रताप का अंग ~७३/७६*
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*निष्काम नाम ले नर नारायण, सुमिरत शक्ति१ सकाम ।*
*रज्जब रज२ तज काढ़ तू, भजन भेद गति३ प्राम४ ॥७३॥*
निष्काम भाव से नाम-स्मरण करने से नर नारायण को प्राप्त करता है और सकाम भाव से करने से माया१ मिलती है । हे साधक ! तू रजोगुण२ का त्याग करके मन को माया से निकाल, तभी तुझे भजन भेद की रीति३ प्राप्त४ होगी ।
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*नाम विसारे नींद है, गृह वैराग्य सु हानि ।*
*रज्जब रटे सु रैनि दिन, सोई जाग्या जानि ॥७४॥*
राम नाम को भूलना ही निद्रा है, नाम को भूलने से गृहस्थ तथा विरक्त दोनों को ही हानि है जो रात्रि-दिन नाम को रटता है, वही जगा हुआ है ऐसा ही जानना चाहिये ।
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*झूंठ साँच के संग सदा, ज्यों दीपक अँधियार ।*
*रज्जब लोई लय बुझत, तिमिर न आवत बार ॥७५॥*
जैसे दीपक के साथ अँधेरा रहता है, वैसे ही सत्य के साथ मिथ्या रहता है । दीपक की ज्योति बुझने पर अँधेरे को आते देर नहीं लगती, वैसे ही सत्य स्वरूप परमात्मा के नाम का स्मरण हटाते ही हृदय में मिथ्या मायिक प्रपंच आते देर नहीं लगती ।
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*रज्जब रीता राम बिन, भर्या भजे भगवान ।*
*मनसा वाचा कर्मना, नीके किया निदान ॥७६॥*
राम के भजन के बिना प्राणी खाली है, जो भगवान का भजन करता है वही भरा है । हमने मन, वचन, कर्म से खाली और भरे का यही मूल कारण निश्चय किया है ।
(क्रमशः)

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