#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
.
.
*करि मन उनि सन्तनि की सेवा ।*
*जिनकै आंन भरौसा नाहीं,*
*भजहिं निरञ्जन देवा ॥(टेक)*
*सील सन्तोष सदा उर जिनकै,*
*राम नाम के लेवा ।*
*जीवत मुक्त फिरै जग महिंया,*
*उरझे कौ सुरझेवा ॥१॥*
*जिनके चरण कंवल कौ बंछत,*
*गंगा जमुना रेवा ।*
*सुन्दरदास उनहुँ की संगति,*
*मिलि हैं अलष अभेवा ॥२॥*
रे मेरे मन ! उन सन्तों की सेवा-पूजा कर, जिनको भगवान् के अतिरिक्त किसी अन्य पर विश्वास नहीं है, अतः वे केवल उसी निरञ्जन देव की पूजा अर्चना में व्यस्त रहते हैं ॥टेक॥
जिनके हृदय में शील(सदाचार) एवं संतोष रहता है, ऐसी स्थिति में वे निरन्तर उसी भगवान् निरञ्जन देव के नाम का जप करते रहते हैं । तथा ऐसा करते हुए वे लोकयात्रा(जीवन) का निर्वाह करते हुए जीवन की विविध गुत्थियों को भी सुलझाते रहते हैं ॥१॥
वे इतने पवित्र आचरण वाले हैं कि गंगा, यमुना, रेवा आदि पवित्र नदियाँ भी, जहाँ हम स्वकीय पापपङ्कप्रक्षालनार्थ स्नान करने के इच्छुक रहते हैं, उनके चरण कमलों की निरन्तर इच्छा करती रहती है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें