#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*देषौ भाई आज भलौ दिन लागत ।*
*बरिषा रितु कौ आगम आयौ,*
*बैठि मलारहिं रागत ॥(टेक)*
*राम नाम के बादल उनये,*
*घोरि घोरि रस पागत ।*
*तन मन मांहिं भई शीतलता,*
*गये बिकार जुदागत ॥१॥*
*जा कारनि हम फिरत बिवोगी,*
*निशि दिन उठि उठि जागत ।*
*सुन्दरदास दयाल भये प्रभु,*
*सोई दियौ जोई मांगत ॥२॥*
अरे भाई ! आज बहुत शुभ दिन प्रतीत हो रहा है । वर्षा ॠतु का आरम्भ हो रहा है । एक स्थान पर मल्हार राग गाने की इच्छा हो रही है ॥टेक॥
राम नाम के मेघ उमड़ आये हैं । वे सुख का रस घोल घोलकर वर्षा रहे हैं । जिससे हमारे तन मन में शीतलता छा गयी है । सभी प्रकार के दोष विनष्ट हो गये हैं ॥१॥
जिस कारण से हम वियोगी होकर घूम रहे थे । दिन रात जागते रहते थे । महात्मा सुन्दरदासजी कहते हैं – आज प्रभु की ऐसी कृपा हो गयी कि हमने जो माँगा था वही मिल गया है ॥२॥
(क्रमशः)

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