शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

= सुन्दर पदावली(२५.राग ऐराक - ४/१) =

#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
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*रासा रे सिरजनहार का सौ मैं निस दिन गाऊं ।* 
*करजोरें बिनती करौं क्यौं ही जौ दरसन पाऊं ॥(टेक)* 
*उतपति रे सांई तैं किया प्रथम हि वो ओंकारा ।* 
*तिसतें तीन्यौं गुन भये पीछै पंच पसारा ॥१॥* 
मैं इस सृष्टि के एकमात्र रचयिता प्रभु का गुणगान निरन्तर करता रहता हूँ । तथा अपने हाथ जोड़कर उनसे निरन्तर विनती करता रहता हूँ कि किसी प्रकार मुझको उनके दर्शन हो जायँ ॥टेक॥ 
हे स्वामिन् ! एक ओंकार अक्षर का आश्रय लेकर तीनों गुणों की रचना कर उनसे यह पाँच तत्त्वों की रचना की ॥१॥
(क्रमशः)

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