#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*रासा रे सिरजनहार का सौ मैं निस दिन गाऊं ।*
*करजोरें बिनती करौं क्यौं ही जौ दरसन पाऊं ॥(टेक)*
*उतपति रे सांई तैं किया प्रथम हि वो ओंकारा ।*
*तिसतें तीन्यौं गुन भये पीछै पंच पसारा ॥१॥*
मैं इस सृष्टि के एकमात्र रचयिता प्रभु का गुणगान निरन्तर करता रहता हूँ । तथा अपने हाथ जोड़कर उनसे निरन्तर विनती करता रहता हूँ कि किसी प्रकार मुझको उनके दर्शन हो जायँ ॥टेक॥
हे स्वामिन् ! एक ओंकार अक्षर का आश्रय लेकर तीनों गुणों की रचना कर उनसे यह पाँच तत्त्वों की रचना की ॥१॥
(क्रमशः)

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