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🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
*दादू मारग साधु का, खरा दुहेला जान ।*
*जीवित मृतक ह्वै चलै, राम नाम नीशान ॥*
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भंडारी नानकदासजी ~ नानकदासजी टीकमदासजी के शिष्य थे । ये भी दादू द्वारे के भंडारी रहे । ये प्रतिष्ठित, श्रीमान् साधू थे । इनकी समाधि मकराने पत्थर की स्टेशन रोड नारायणा में हाथी भाटा के पास है । वहां तिवारा व कूवा भी है । इनके चरण इनके शिष्य नूं नंदराम(नौनिधि) जी ने पधराये थे । इनके तीन शिष्य थे~ १- नूं नंदरामजी २- बुधराम ३- भक्तराम । इनकी छत्री में अंकित शिलालेख~
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“कूप खण्यो छतरी करी, परमारथ हितधाम ।
चरण सु श्रीगुरुदेव के, धरे सु नौनन्दराम ॥१॥
श्रीनिर्भय रणछोड़ के, टीकम टीकूदास ।
भंडारी भक्तन बड़े, तत् शीश नानकदास ॥२॥
अठारह सै सित्यासिये, म्हा सुदि सातें बार ।
सुर गुरु दिन नामक चले, भव जल उतरे पार ॥३॥
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भंडारी नूं नंदरामजी = नूं नन्दरामजी दादूद्वारा नारायणा के भंडारी रहे । कर्तव्य परायण और राज्यकार्य में प्रवीण थे । आपने नारायणा नगर में कुंड पर अपना स्वतन्त्र विशाल स्थान बनवाया था । यह स्थान वि. सं. १८८५-८६ में बनवाया था । स्थान पर २५ सों साधू निवास करते थे । स्थान के नीचे वि. स. १८९३ में भूमि व कूप भी लगा दिये थे । जिससे स्थान में रहने वाले साधुओं का योग-क्षेम चलता रहे । आपके दो गुरुभाई और थे । १- बुधरामजी २-भक्तरामजी । तीनों के चरण एक साथ आपके उत्तराधिकारी शिष्य रामरतनजी ने पधराये थे ।
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तीनों के चरणों का परिचय~दोहा~
कार्तिक शुक्ला सप्तमी उगणीसै अरु एक ।
नूंनन्दराम जु हरि मिले, गही नाम की टेक ॥१॥
भे भण्डारी उग्रजश, संतसभा गुण गाय ।
नूंनंन्दरामजी भक्तिकर, मिले ब्रह्म में जाय ॥२॥
श्रावण शुक्ला पूर्णिमा, बुधि सागर बुधराम ।
अठारह सौ सत्यानवे, जाय मिले निज धाम ॥१॥
कार्तिक कृष्णा सप्तमी, भक्तराम गुण गाय ।
उगणी सै सोडस अधिक, हरिपुर पहुँचे जाय ॥१॥
गुरु भक्ता स्व गुरु चरण, शुभ मूर्ति सर्व मान ।
रामरतन जु मानचित्त, पधराये निज मान ॥२॥
मिति वैशाख सुदी ३ शुक्रवार वि. सं. १९२२ का ।
(क्रमशः)

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