*🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏*
*🌷卐 सत्यराम सा 卐🌷*
*साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi @Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
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*३०. तीर्थ सत्संग का अंग~ ५/८*
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*ज्ञान गंग तहँतें१ चली, प्राणि प्रवीण सु न्हाहिं ।*
*रज्जब पाप जू युगन के, जीव जड़े सो जाँहिं ॥५॥*
जैसे गंगा ब्रह्म लोक में स्थित विष्णु के चरणों१ से चली है, वैसे ही संतों के हृदय में स्थित परमात्मा के स्वरुपभूत चरणों से ज्ञान-गंगा चली है, इसमें चतुर प्राणी स्नान करते हैं । जो युगों से जीव के ह्रदय में पाप भूषण में नग के समान जटित हैं, वे सभी ज्ञान-गंगा में स्नान करने से हट जाते हैं ।
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*ज्ञान गंग पर देही१ देवल२, मूरति आतम राम ।*
*इहां३ सांपड़ो४ सेय प्राणपति, सरहि५ शिरोमणि काम ॥६॥*
ज्ञान-गंगा पर आत्मा१ रूप मंदिर२ है, आत्म स्वरुप राम ही उसमें मूर्ति है अर्थात ज्ञान द्वारा आत्म स्थित होने पर ही आत्मा में आत्मस्वरूप राम का साक्षात्कार होता है । अतः इस३ ज्ञान-गंगा में स्नान४ करके आत्म स्थिति द्वारा अभेद रूप से ब्रह्म की भक्ति करो अर्थात निरंतर ब्रह्माकर वृत्ति रक्खो, इससे तुम्हारा परम-सुख प्राप्ति रूप सबसे बड़ा कार्य सिद्ध५ होगा ।
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*सत्य तीर्थ सत्संग है, वारि विमल बिच बोध ।*
*रज्जब राज मल ऊतरे, वेत्ता१ वदन२ सु शोध३ ॥७॥*
सच्चा तीर्थ सत्संग ही है, संशय विपर्य्यय रहित पवित्र ज्ञान ही उसमें जल है, सत्संग तीर्थ में स्नान करने से पाप रूप मल और अविद्या रूप रज सदा के लिए उतर जाते हैं । ज्ञानी१ के मुख२ के शब्दों में इस ज्ञान-जल को खोज३ कर स्नान करो ।
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*सत्य तीर्थ सत्संग है, जल जगदीश्वर नाम ।*
*दान पूण्य को बहु किये, रज्जब अठसठ ठाम१ ॥८॥*
दान, पुण्य, यज्ञादि करके उनका फल स्वर्गादी सुख भोगने के लिए तो बहुत तीर्थ बनाए हैं और उनमें ६८ स्थान१ मुख्य हैं किन्तु सच्चा तीर्थ तो सत्संग ही है, परमात्मा का नाम ही उनमें जल है अर्थात सत्संग द्वारा नाम चिंतन करने से ही परमात्मा की प्राप्ति होती है, सत्य ब्रह्म की प्राप्ति में हेतु होने से ही सत्संग सत्य तीर्थ है ।
(क्रमशः)

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