सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

*४९. भ्रम विधवंस कौ अंग २५/२८*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*#पं०श्रीजगजीवनदासजीकीअनभैवाणी*
*श्रद्धेय श्री Tapasvi @Ram Gopal Das की प्रेरणा से*
*वाणी-अर्थ सौजन्य ~ Meta AI*
.
*४९. भ्रम विधवंस कौ अंग २५/२८*
.
*कहि जगजीवन रांम बिन, बात न पूछै कोइ ।*
*ताथैं हरि भजि प्रीति सौं, सांई सनमुख होइ ॥२५॥*
जगजीवन साहेब कहते हैं कि राम नाम के बिना इस संसार में जीव की कोई बात नहीं पूछता, कोई कीमत नहीं है । जैसे बिना आत्मा के शरीर की कोई कीमत नहीं, वैसे ही राम नाम बिना सारे तीर्थ व्यर्थ हैं । इसलिए प्रीति और प्रेम से हरि को भजो, सच्चे प्रेम से भजन करने पर सांई यानी स्वामी खुद तुम्हारे सामने आ जाते हैं । भगवान को प्रेम प्यारा है, तीर्थ नहीं ॥२५॥
.
*जगजीवन तीरथ सकल, रांम नांम मंहि जांण ।*
*पूरण२ ब्रह्म पिछांणिये, हरि भजि वो मति आंण२ ॥२६॥*
(२-२. पूरण ब्रह्म.....आंण...ब्रह्मसाक्षात्कार हो सके=ऐसे ज्ञान की प्राप्ति का प्रयास कर)
जगजीवन जी कहते हैं कि सारे तीर्थों को राम नाम में ही समाया हुआ जानो । जो फल अड़सठ तीर्थों में मिलता है, वह एक राम नाम में मिल जाता है । इसी राम नाम के भजन से पूरण ब्रह्म की पहचान होती है । इसलिए हे मन, ऐसी बुद्धि ला, ऐसी मति ला, कि तू सदा हरि को ही भजे, और किसी भ्रम में न पड़े ॥२६॥
.
*नित प्रति घर घर निरजला३, प्रेम न पीवहि पूरि ।*
*जगजीवन सूकै सकल, वो जल इन थैं दूरि ॥२७॥*
(३. निरजला=निर्जला एकादशी व्रत)
लोग रोज घर-घर में निर्जला व्रत रखते हैं, पूरे दिन पानी भी नहीं पीते, शरीर को सुखाते हैं, पर प्रेम का पूरा जल नहीं पीते । जगजीवन जी कहते हैं कि प्रेम के बिना सब साधना सूखी है, जैसे बिना पानी के खेत सूख जाता है । वह असली प्रेम रूपी जल इन बाहरी सूखे व्रतों से बहुत दूर है । सच्चा व्रत तो प्रेम से भीगना है, देह को सुखाना नहीं ॥२७॥
.
*जगत जला४ जन निरजला, व्रत सुमिरन वेसास ।*
*पारंगति परमारथी, सु कहि जगजीवनदास ॥२८॥*
(४. जला=नष्ट हुआ)
एक ओर सारा जगत विषय-वासना की आग में जला हुआ है, दूसरी ओर जन यानी साधक कहलाने वाले लोग निर्जला व्रत और केवल बाहरी सुमिरन के वेश पर विश्वास रखे बैठे हैं । जगजीवनदास जी कहते हैं कि सच्चा पारंगत और सच्चा परमार्थी वह है जो इन दोनों से पार चला जाए । जो न तो विषयों की आग में जले, न केवल बाहरी वेश में उलझा रहे, बल्कि भीतर के प्रेम तत्व को पहचान ले, वही पार होता है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें