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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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बूडसू गमन ~
कुचामण से विदा होकर आचार्यजी अपने मंडल के सहित बूडसू के ठाकुर के आग्रह से बूडसू पधारे । बूडसू ठाकुर साहब ने आचार्य उदयराम जी महाराज का विधि सहित अतिथि सत्कार किया और आपसे गुरुमंत्र व उपदेश ग्रहण किया । अच्छी सेवा की ।
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बूडसू की जनता ने आचार्य उदयरामजी महाराज से दादूवाणी का प्रवचन श्रवण करके अति आनन्द प्राप्त किया । उक्त प्रकार बूडसू ठाकुर साहब तथा वहां की जनता को उपदेश देकर वहां से मर्यादा पूर्वक विदा हुये और मार्ग के लोगों को अपने दर्शन तथा उपदेशों से कृतार्थ करते हुये नारायणा दादूधाम में पधार गये ।
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रामत व चातुर्मास ~
वि. सं. १९२० में जयपुरवाटी की रामत की । इस रामत में स्थानधारी साधुओं के तथा भक्त जनों के आग्रह से अनेक ग्रामों में पधारे । भाटों वाले ग्राम में आपके रथ में खराबी आ गई । वहां के खाती को बुलाया किन्तु उसका पुत्र मर गया था अत: शोक से व्यथित होने से नहीं आया ।
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आपने ध्यान द्वारा उसके दुख को जान लिया और उसको ४ पुत्र होने का वर दिया फिर उसने रथ ठीक कर दिया । कहा भी है -
संत दुखी को देखकर, द्रवित होत तत्काल ।
उदयराम ने कर दिया, चवसुत देय निहाल ॥३१२॥द्द. त. ११
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दादूवाणी का प्रवचन श्रवण कराते हुये तथा सेवकों को गुरु मंत्र का उपदेश देते हुये शनै: शनै: राजगढ पधारे । कुछ दिन राजगढ के भक्तों को तथा आसपास के जो भक्त लोग दर्शनार्थ आते थे उन सबको उपदेश देते रहे । फिर वहां से रामत करते हुये चातुर्मास करने के लिये संत ब्रताबरदासजी मानदासजी के स्थान पर पधारे ।
(क्रमशः)













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